daytalk

किन लोगों का जलाकर नहीं किया जाता है अंतिम संस्कार, जानें ज्योतिष विशेषज्ञ की राय – whose last rites are not performed by cremation or antim sanskar know the opinion of the astrology expert tvisg

भारत में कई तीर्थस्थल हैं, जिनमें से हर एक का अपना महत्व है. माना जाता है कि इनमें से कुछ स्थानों पर भक्तों के पाप धुल जाते हैं, जबकि अन्य बीमारियों को ठीक करने के लिए प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक है वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, जो मोक्ष नगरी के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि काशी में मरने वाले लोग भगवान विष्णु के दिव्य निवास वैकुंठ सीधे जाते हैं. कई लोग अपने अंतिम दिन काशी में बिताना पसंद करते हैं.

वाराणसी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स नाव पर खड़े होकर बता रहा है कि आखिर किस तरह के शवों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाना चाहिए. उस शख्स ने बताया कि संत या महात्मा, 12 साल तक के बच्चे, सर्पदंश से मृत और गर्भवती महिलाएं, इन सब का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए. 

इस वीडियो और इसके दावे के बारे में ज्योतिष विशेषज्ञ आचार्य वेद प्रकाश मिश्रा ने कहा कि ‘जब साधु संन्यास ग्रहण करते हैं तो वह अपने जीवन का श्राद्ध करके आते हैं. इसलिए, मृत होने के बाद उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है. क्योंकि फिर उनका पिंडदान और श्राद्ध करना पड़ता है, जबकि जीते जी उनका जीवंत श्राद्ध हो चुका होता है. 

वाराणसी के ज्योतिष विशेषज्ञ आचार्य वेद प्रकाश मिश्रा

इसी प्रकार सर्पदंश से मरने वाले का भी अंतिम संस्कार नहीं करते हैं. माना जाता है कि मृत व्यक्ति में चेतना रहती है इसलिए सर्पदंश वालों का भी अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है.

आचार्य वेद प्रकाश मिश्रा ने आगे बताया कि ‘गर्भवती महिलाओं के मामले में यह होता है कि शिशु को निकाल कर दफना दिया जाता है या फिर बहा दिया जाता है. जबकि गर्भवती महिला का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है क्योंकि उनके 16 संस्कार हो चुके होते हैं. उन्होंने बताया कि जहां तक छोटे बालक का सवाल है तो ऐसे बालकों में जिनका यज्ञोपवीत से लेकर अन्य संस्कार नहीं हुआ है उन्हें जल में प्रवाहित कर दिया जाता है. क्योंकि 16 संस्कार पूरे होने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाता है.

आगे उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग से पीड़ित मृतकों को भी नहीं जलाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि उनके शव से निकले कीड़ों से अन्य शवयात्री और लोग संक्रमित हो सकते है. इसलिए उन्हें भी नहीं जलाया जाता है. उन्होंने बताया कि यह सभी शास्त्र संगत है और सत्य है. लेकिन, इनमें से कुछ विसंगतियां भी हैं जिनको नहीं मानना चाहिए और सत्य के प्रमाण के अनुसार ही चलना चाहिए.

Exit mobile version