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Murshidabad violence Fact check – घातक घिबली: मासूम कार्टून बंगाल में कैसे बन गए नफरत के हथियार – know how ghibli cartoons trend fuels murshidabad violence in west bengal for hatred ntc

घिबली शब्द सुनकर आपके दिमाग में क्या आता है? प्यारे, मासूम, गोल-मटोल से कार्टून किरदारों वाली तस्वीरें? हो सकता है आपने भी अपनी और अपने परिवार की ऐसी फोटो बनाई हो.

तकरीबन एक महीने पहले जब घिबली का ट्रेंड शुरू हुआ, तो नेता से लेकर अभिनेता सबने इस पर हाथ आजमाया. लेकिन अब इन क्यूट-सी दिखने वाली तस्वीरों का एक खतरनाक इस्तेमाल सामने आया है. 

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के विरोध में भड़के दंगों के दौरान सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने के लिए घिबली स्टाइल वाली फोटो का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है.

आजतक फैक्ट चेक को घिबली स्टाइल वाली कई तस्वीरें मिलीं जिनमें हथियारों से लैस लोग नजर आ रहे हैं. इन तस्वीरों को भड़काऊ संदेश के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.

लोग ऐसी तस्वीरें दो कारणों से शेयर कर रहे हैं. पहला- घिबली स्टाइल की लोकप्रियता की फायदा उठाना.  दूसरा – सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम (हिंसा, अपराध आदि से संबंधित कंटेंट पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया) को चकमा देना. 

घातक घिबली 

धार्मिक रैलियों में धारदार हथियार लिए हुए लोगों की तस्वीरें घिबली के अंदाज में खूब बनाई जा रही हैं. ऐसी ही एक तस्वीर में लोगों को तलवार और पत्थर वगैरह इकट्ठा करके रखने की सलाह दी जा रही है.  

एंग्री मैन गोपाल पाठा

गोपाल मुखर्जी उर्फ गोपाल पाठा की घिबली स्टाइल की तस्वीरें भी मुर्शिदाबाद हिंसा के संदर्भ मे खूब शेयर हो रही हैं. इनके साथ भड़काने वाले कैप्शन भी लिखे जा रहे हैं.

खबरों के मुताबिक, पाठा ने 1946 में कलकत्ता में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान कई हिंदुओं की जान बचाई थी.

अब गोपाल पाठा की घिबली स्टाइल वाली तस्वीरों को शेयर करते हुए लोगों को हथियार उठाने को उकसाया जा रहा है. ऐसे ही एक एक्स पोस्ट में कट्टरपंथी मुस्लिमों से हिंदू महिलाओं और बच्चों की रक्षा करने के लिए सेना बनाने का आह्वान किया गया है.

बंगाल के हिंदू राष्ट्रवादी नेताओं की घिबली स्टाइल की कई तस्वीरें भी इस संदर्भ में शेयर हो रही हैं.

मिसाल के तौर पर, हिंदू संहति नामक संस्था के संस्थापक तपन घोष की घिबली स्टाइल तस्वीर 9 अप्रैल को फेसबुक पर शेयर की गई. यानी मुर्शिदाबाद दंगे शुरू होने के ठीक एक दिन बाद.

इस तस्वीर में तपन किसी सभा को संबोधित करते दिख रहे हैं. साथ ही, बंगाली में लिखा है- “अपने धर्म की रक्षा के लिए कौन-कौन गोपाल मुखर्जी बनने के लिए तैयार है? अब पक्का इरादा कर लो.” ये बात तपन घोष ने 14 फरवरी, 2016 को एक कोलकाता में एक भाषण के दौरान कही थी.

ममता पर निशाना

इस आर्ट स्टाइल को नेताओं पर निशाना साधने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है. उदाहरण के तौर पर, बंगाल बीजेपी ने क पोस्ट में ममता बनर्जी का कार्टून बनाकर उन्हें हिटलर के रूप में दिखाया.

घिबली स्टाइल की एक अन्य तस्वीर में ममता बांसुरी बजाती दिख रही हैं. पीछे भयानक आग लगी दिखती है. एक फेसबुक यूजर ने इसे शेयर करते हुए तंज कसा, “जब बंगाल जल रहा था, उस वक्त मोमिना बंशी बजा रही थीं.”

कुछ तस्वीरों में घिबली स्टाइल के जरिये मुर्शिदाबाद से हिंदुओं के पलायन का दर्द भी दिखाने की कोशिश की गई है.

बंगाल की कुछ हालिया चर्चित घटनाओं को भी घिबली स्टाइल में दिखाया जा रहा है. जैसे, कोलकाता की वो घटना जिसमें कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक ड्राइवर को बस से भगवा झंडा हटाने के लिए मजबूर किया.  

टूट रहा है सुरक्षा का चक्रव्यूह

एक्स की गाइडलाइंस के मुताबिक अगर किसी हिंसक फोटो या वीडियो में उचित लेबल लगा है और वो जरूरत से ज्यादा क्रूरता, खून-खराबा या यौन हिंसा को नहीं दिखाती, तो उसे पोस्ट किया जा सकता है. लेकिन इनके जरिये किसी को धमकाने, भड़काने, महिमामंडन करने या हिंसा भड़काने की अनुमति नहीं है.

लेकिन ये साफ है कि फिलहाल सोशल मीडिया के फिल्टर घिबली की आड़ में सांप्रदायिक नफरत भड़काने वाले पोस्ट को रोकने में नाकाम हैं. 

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