Nishikant Dubey Profile – 4 बार के सांसद, MBA-पीएचडी, JPC-PAC में रोल… कौन हैं निशिकांत दुबे CJI पर जिनके बयान पर हो रहा विवाद? – Who is Nishikant Dubey whose statement on CJI and Supreme Court creating controversy ntc

निशिकांत दुबे को बीजेपी प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उनकी मुखरता और विभिन्न मुद्दों पर अपनी पार्टी का बचाव  करने के लिए जाना जाता है. हालांकि, इस बार झारखंड के गोड्डा से इस लोकसभा सांसद ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसे लेकर विपक्ष बीजेपी पर हमलावर है. यहां तक कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेनी नड्डा को आगे आकर कहना पड़ा कि निशिकांत दुबे का बयान निजी है और पार्टी का इससे कुछ लेना-देना नहीं है. जवाब में दुबे ने कहा कि वह पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं और वह पार्टी जो कहेगी, वही करेंगे. 

भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर शीर्ष अदालत को ही कानून बनाना है तो संसद और राज्य विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए. वह यहीं नहीं रुके, उन्होंने देश में हो रहे गृह युद्धों के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट इस देश को अराजकता की ओर ले जाना चाहता है.

निशिकांत दुबे ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ‘आप (सुप्रीम कोर्ट) नियुक्ति प्राधिकारी को कैसे निर्देश दे सकते हैं? राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं. संसद इस देश का कानून बनाती है. आप उस संसद को निर्देश देंगे? आपने नया कानून कैसे बना दिया? किस कानून में लिखा है कि राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर फैसला लेना है? मस्जिदों के लिए आप कहते हैं कि उनसे संपत्ति के कागजात मांगना गलत है, लेकिन मंदिरों के लिए आप खुद ही कागज मांगते हैं. यह दोहरा मापदंड क्यों? अगर देश में कोई धार्मिक युद्ध भड़का रहा है, तो वह सुप्रीम कोर्ट है. आप इस देश को अराजकता की ओर ले जाना चाहते हैं.’ 

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कौन हैं निशिकांत दुबे? 

बिहार के भागलपुर में 28 जनवरी, 1969 को जन्मे 56 वर्षीय दुबे जनसंघ नेता के भतीजे हैं. वह मूल रूप से देवघर के रहने वाले हैं, जो अब झारखंड में पड़ता है. उनका राजनीतिक सफर देवघर से ही शुरू हुआ. वह बहुत कम उम्र में ही आरएसएस से जुड़ गए थे और इसकी शाखाओं में जाने लगे थे. भाजपा नेता को लोकसभा में एक मुखर वक्ता के रूप में जाना जाता है. संसद जब चालू रहती है, तो दुबे की उपस्थिति करीब 100 फीसदी रहती है. सवाल पूछने, बहसों में हिस्सा लेने और प्राइवेट मेम्बर्स बिल लाने के मामले में उनकी गिनती देश के अग्रणी सांसदों में होती है. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से छात्र राजनीति में कदम रखा. कॉर्पोरेट जगत में कुछ समय बिताने के बाद वह 2009 में सक्रिय राजनीति में उतरे और तबसे झारखंड के गोड्डा से लगातार 4 बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं. 

निशिकांत दुबे के पास डॉक्टरेट की उपाधि है. उन्होंने मैनेजमेंट में पीएचडी किया है और उनके पास एमबीए की डिग्री है. राजनीति में आने से पहले वह एस्सार ग्रुप में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक, निशिकांत दुबे अक्सर विपक्षी नेताओं पर निशाना साधने में आगे रहते हैं. हाल के वर्षों में, संसद में प्रमुख बहसों के दौरान पार्टी का पक्ष रखने या विपक्ष पर हमला करने के लिए वह भाजपा के पसंदीदा नेता रहे हैं. लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर 2023 पर बहस के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में उनके चयन ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था. जब सभी को उम्मीद थी कि भाजपा अपनी किसी महिला सांसद को मैदान में उतारेगी, तब पार्टी ने गोड्डा सांसद को मोर्चा संभालने के लिए मैदान में उतारा था. 

इस साल फरवरी में निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी के हमले का नेतृत्व किया था, जब विपक्ष के नेता ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कुछ ऐसा कहा था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था. दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिखकर गांधी के खिलाफ ऐतिहासिक और ठोस तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने औरदेश का उपहास करने, गणतंत्र की प्रतिष्ठा को कम करने के लिए विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही की मांग की थी. राहुल गांधी ने विदेश नीति पर चर्चा करते हुए कहा था कि विदेश मंत्री एस जयशंकर को डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करवाने के लिए तीन से चार बार अमेरिका भेजा गया था. 

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एनआरसी के रहे हैं मुखर समर्थक

निशिकांत दुबे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के मुखर समर्थक हैं. उन्होंने लगातार झारखंड में एनआरसी की मांग की है. उनका आरोप है कि बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों के अनियंत्रित प्रवेश से राज्य में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहा है. पिछले वर्ष उन्होंने लोकसभा के एक सत्र के दौरान कहा था कि बांग्लादेश की सीमा से लगे पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों को बिना दस्तावेज वाले आव्रजन (कोई कागजात दिखाए बिला बांग्लादेश से आने वाले लोग) पर लगाम लगाने के लिए केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाना चाहिए. दुबे का आरोप है कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहा है और उनकी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है. पिछले साल के अंत में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इसे एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था. हालांकि इसका चुनावी प्रभाव नहीं पड़ा और सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा सत्ता में लौटने में कामयाब रही.

विकास कराने वाले सांसद की छवि 

निशिकांत दुबे गोड्डा में चिकित्सा संस्थानों की स्थापना को लेकर बेहद सक्रिय हैं. संथाल परगना डिवीजन के देवघर में एम्स की स्थापना में उनकी भूमिका काफी अहम थी. ऐसा कहा जाता है कि देवघर हवाई अड्डे की स्थापना में भी उनकी प्रमुख भूमिका थी. वह वित्त, गृह, पर्यटन एवं संस्कृति, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, वाणिज्य मंत्रालय की स्थायी संसदीय समितियों के सदस्य रहे हैं. वहीं कई संसदीय समितियों की अध्यक्षता की है. वह संसद की लोक लेखा समिति (PAC) और संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सदस्य रहे हैं. निशिकांत दुबे वक्फ संसोधन विधेयक पर चर्चा और विचार-विमर्श के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति में भी शामिल थे. 

दुबे 2014 में लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश करना चाहते थे, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के लिए निचले सदन में पांच सीटें बनाने की मांग की थी. हालांकि, संसदीय समिति ने उनकी पेशकश को खारिज कर दिया था. उन्होंने 2017 में जम्मू-कश्मीर में धारा 370 और 35ए समाप्त करने के लिए भी संसद में निजी विधेयक पेश किया था. बता दें कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 समाप्त कर दिया था, जिसके बाद राज्य को मिलने वाला विशेष दर्जा खत्म हो गया था. मोदी सरकार ने लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया था. जम्मू-कश्मीर को भी पूर्ण राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.

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निशिकांत के कारण गई महुआ मोइत्रा की सांसदी

निशिकांत दुबे ने ही 17वीं लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ ‘कैश फॉर क्वेरी’ (पैसे के बदले सवाल पूछना) के आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि महुआ ने संसद में सवाल पूछने के लिए बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से पैसे और तोहफे लिए थे. वह ​हीरानंदानी के निर्देश पर उनके प्रतिद्वंद्वी उद्योग समूह (अडानी ग्रुप) पर संसद में हमले करतीं और उससे जुड़े सवाल पूछतीं. लोकसभा स्पीकर ने मोइत्रा पर लगे आरोपों की संसद की एथिक्स कमिटी से जांच कराई थी, जिसमें वह दोषी पाई गई थीं. महुआ मोइत्रा को अपना संसदीय लॉगइन आईडी और पासवर्ड उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी को देने का दोषी पाया. इसके बाद उन्हें अपनी सांसदी गंवानी पड़ी थी.

पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी पर किया जुबानी हमला

सुप्रीम कोर्ट पर बयान देने के अगले ही दिन निशिकांत दुबे ने 20 अप्रैल को पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी पर तीखा हमला किया और उन्हें वक्फ कानून पर दिए उनके बयान को लेकर घेरा. कुरैशी ने 17 अप्रैल को X पर एक पोस्ट में आरोप लगाया था कि वक्फ कानून मुस्लिमों की जमीन हड़पने के लिए सरकार की एक शैतानी चाल है. उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रोपेगेंडा मशीनरी ने पुराने वक्फ कानून को लेकर गलत सूचना फैलाने का अपना काम बखूबी किया है. उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट इस पर सवाल उठाएगा. कुरैशी पर पलटवार करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर निशिकांत दुबे ने लिखा, ‘आप चुनाव आयुक्त नहीं, मुस्लिम आयुक्त थे. झारखंड के संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोटर सबसे ज्यादा आपके कार्यकाल में ही बनाया गया. इस्लाम भारत में 712 में आया. इसके पहले तो यह जमीन हिंदुओं की या उस आस्था से जुड़ी आदिवासी, जैन या बौद्ध धर्मावलंबी की थी. मेरे गांव विक्रमशिला को बख्तियार खिलजी ने 1189 में जलाया. विक्रमशिला विश्वविद्यालय ने दुनिया को पहला कुलपति दिया अतिश दीपांकर के तौर पर. इस देश को जोड़ो, इतिहास पढ़ो, तोड़ने से पाकिस्तान बना, अब बंटवारा नहीं होगा.’
 

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